Friday, June 27, 2008
1983 के हीरो
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 25 जून 1983 का दिन सुनहरे पन्ने में दर्ज है...इस दिन भारत ने वेस्ट इंडिज को वल्र्ड कप फाइनल में पटकनी देकर क्रिक्रेट की दुनिया में उसकी बादशाहत को चुनौती दी थी...वैसे तो पूरे टुर्नामेंट के दौरान हर खिलाड़ी ने अपना किरदार बखूबी निभाया था ..पर कुछ नाम ऐसे हैं जिनके बगैर विश्व विजेता बनने की राह आसान नहीं थी...आइए टीम इंडिया को वल्र्ड चैंपियन बनवाने में अहम भूिमका निभाने वाले पांच स्टार क्रिक्रेटरों के परफॉर्मेंस पर नजर डालते हैं ...सबसे पहले बात कपिलदेव की ...कपिल ने अपनी कप्तानी और हरफनमौला खेल से सबका दिल जीत लिया था ...उन्होने अपनी टीम के लिए संकटमोचन की भूमिका निभाई थी..जिंबाब्वे के खिलाफ उनकी 175 रन की पारी का तो हर कोई कायल है ...अकेले दम पर कपिल ने भारतीय टीम की नैया पार लगाई थी ...और इस पारी के लिए कपिल मैन ऑफ दी मैच भी चुने गए थे... कपिल ने 60.60 के औसत और 109 के स्ट्राइक रेट से भारत के लिए सबसे अधिक 303 रन बनाए थे ..गेंदबाजी में 20.41 के औसत से 12 विकेट भी उनके खाते में दर्ज है ..इतना ही नहीं उन्होने सात कैच भी लपके थे ...जिसमें विवियन रिचर्डस का वो शानदार कैच भी शामिल था जो फाइनल मैच का टर्निग पॉइंट साबित हुआ ...कपिल ने खुद के प्रदर्शन से साथी खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल कायम की थी ... ....स्टार खिलाड़ियों में दूसरा नाम है मोहिंदर अमरनाथ का ...फाइनल और सेमिफाइनल दोनो में मैन ऑफ द मैच रहे थे अमरनाथ ...सेमिफाइनल में इंगलैंड के खिलाफ बहुमूल्य 46 रन बनाए थे और साथ ही दो अहम विकेट भी लिए थे ....फाइनल में वेस्ट इंडिज के खिलाफ उन्होने अपन ऑलराउंड खेल से भारत को विश्व विजेता बनाने में अहम किरदार निभाया था ...जिसमें बेशकीमती 26 रन और तीन विकेट भी शामिल हैं..अमरनाथ ने 30 की औसत से 237 रन बनाए जिसमें 80 रन उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा था...गेंदबाजी में उन्होने 22.25 की औसत से आठ विकेट चटकाए थे.... ......एक और होनहार हरफनमौला खिलाड़ी हैं मदन लाल ...जिंबाब्वे के खिलाफ अपनी घातक गेंदबाजी से इस खिलाड़ी ने भारत को जीत दिला दी ....इस मैच में किफाइती बॉलिंग करते हुए मदन लाल ने तीन कीमती विकेट चटकाए ..इस मैच में मैन ऑफ द मैच रहे मदन लाल ने कई बार अपनी उपयोगिता साबित की ...और बल्लेबाजी में भी जब मदन को मौका मिला उन्होन अपना हुनर दिखाया ..गेंदबाजी में 16.76 के औसत से मदन ने 17 विकेट झटके ...जबकि बल्लेबाजी में 34 के औसत से 102 रन बनाए थे ......अब बात यशपाल शर्मा की जिसने पहले मैच में अपन बल्ले का रंग दिखाया था ...विश्व कप 1983 में भारत के सामने पहले ही मैच में उस समय की सर्वश्रेष्ठ टीम यानि कि वेस्ट इंडिज थी....इसी मैच में यशपाल ने बेहतरीन 89 रन की पारी खेली थी ...इस पारी ने ही भारत की जीत की नींव रखी थी ...पूरे विश्व कप टूर्नामेंट के दौरान यशपाल एक भरोसे के बल्लेबाज साबित हुए थे....सेमिफाइनल में भी यशपाल ने 61 रनों की शानदार पारी खेली थी .....पूरे विश्व कप में इनकी बल्लेबाजीका बोलबाला रहा....उन्होने 34.28 के औसत से 240 रन बटोरे .........अब बात एक ऐसे हीरो की जिसने अपने तूफानी गेंदबाजी से विपक्षी बल्लेबाजों को कभी जमने नहीं दिया ......ये हैं रोजर बिन्नी ... भारत की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट इसी गेंदबाज के खाते में रहे ...ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रोजर की घातक गेंदबाजी के आगे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने घुटने टेक दिए थे ...और भारत के लिए सेमिफाइनल का दरवाजा खुल गया ....इस मैच में उन्होने चार विकेट चटकाए ....इसके लिए उन्हे मैन ऑफ द मैच के पुरस्कार से नवाजा गया ....जब भी टीम को विकेट की जरुरत पड़ी कप्तान ने इस गेंदबाज को याद किया ....और रोजर ने भी अपन कप्तान को भरोसे को कभी टूटने नहीं दिया ....18.66 के औसत से रोजर बिन्नी ने कुल 18 विकेट झटके थे ....पूरे टुर्नामेंट के दौरान बिन्नी के इस स्विंग गेंदबाजी के आगे सभी बल्लेबाज जूझते नजर आए ........इन्ही रणवांकुरों ने भारत को विश्व का सरताज बनाया ...इन्हें लख लख सलाम...
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
1 comment:
भाई इस तरफ आना अच्छा लगा.दिल्ली से दूर के लोग ज्यादा श्रेष्ठ काम कर रहे हैं.
ज़ोर-क़लम और ज्यादा.
Post a Comment