विचार मीमांसा
श्रुति ही जग की परम धरोहर.....
Saturday, February 27, 2021
स्वयं पर करें विश्वास
आप इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि आपकी सफलता दूसरों की राय पर निर्भर नहीं कर सकती है। हवा और मौसम की तरह लोगों की राय बदलती रहती है । सफल होने के लिए आपको लगातार प्रयास करते रहना चाहिए । किसी भी कीमत पर सफल होना है, ऐसी सोच विकसित करनी होगी । आप हमेशा यह मान कर चलें कि हाँ मैं कर सकता हूँ । इसके बाद आप देखेंगे कि आपकी आधी यात्रा पूरी हो चुकी है । आईये जीवन यात्रा में मददगार कुछ अचूक उपाय पर चर्चा करते हैं ।
1. नकारात्मकता से बचें ---- हमारे चारों तरफ नकारात्मक लोगों की भरमार हैं। वे हमारे सगे भी हो सकते हैं या फिर कोई आपका अजीज दोस्त भी हो सकता है । ये लोग आपकी तरक्की में बाधा बन सकते हैं । इसलिए ऐसे लोगों की बातों का बिलकुल भी परवाह नहीं करें । और जो आपका मन कहता है उसी पर विश्वास करें ।
ऐसा भी नहीं कि आप दूसरों की राय की बिलकुल भी परवाह नहीं करेंगे । अपनी आलोचना को सकारात्मक रूप में स्वीकार करें । अपने बारे में सबसे ज्यादा आप खुद जानते हैं अतः आप अपनी आलोचना करने वालों की सच्चाई से वाकिफ हैं । आप खुद देखें कि आलोचना समालोचना है या आपको नाकारात्मक करने की कोई साजिश । निंदक नियरे राखिए वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए आलोचना को सही संदर्भ में लें । तभी सभी नाकारात्मक विचारों से अपने आप को दूर रख पाएंगे ।
2. आप अपने आप को अपना रोल मॉडल बनाएँ ----- नहीं, मेरा मतलब यह कदापि नहीं नहीं है कि आपको घमंड हो जाये की आपसे बेहतर कोई नहीं है , बल्कि आप खुद को प्रोत्साहित करके आपका हौसला बढ़ा सकते हैं। आप ऐसा कर सकते हैं, ये बात हमेशा सोचें फिर देखेंगे की आप अपने काम के प्रति ज्यादा गंभीर हो गए हैं । आप अन्य सफल लोगों और उद्यमियों के बारे में पढ़ें । उनकी कई सारी बातें आप से मिलती जुलती लगेगी । आप देखेंगे की अपने जीवन के शुरुआत ज्यादातर सफल लोग भी आप की तरह ही रहे हैं । तब आपको अपने आप पर और ज्यादा विश्वास हो जायेगा ।
कई ऐसे महान लोग भी मिलेंगे जो अपनी आरंभिक दिनों में कई असफलताओं का सामना किया होगा पर अंततः वो सर्वोच्च शिखर पर पहुंचे । ऐसे कई नाम हैं उदाहरण के तौर पर मैं यहाँ अब्राहमलिंकन और बिल गेट्स को रख सकता हूँ । ऐसे लोगों को पढ़ने से आपको अपने आप को अपना रोल मॉडल बनाने में कोई दिक्कत नहीं होगी । क्यूंकि ये लोग आम आदमी की तरह कई बार गिरे फिर उठकर चल दिए और अंततः मंजिल को प्राप्त करके दम लिया ।
3. जीवन के स्वर्णिम मोड़ पर वापस जाएं -----आप जब कभी आगे का रास्ता अंधकारपूर्ण दिखे तब आप याद करें कि आपके जीवन में सबसे अच्छा वक्त कब रहा है । इसके बाद आप वही रास्ता अख्तियार करें जो उस समय आपने किया था ।आपको उन चीजों को याद करना चाहिए जिन्होंने आपको आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी थी । याद रखें कि सफल होने के लिए : अनुशासन, आत्मविश्वास, स्वतंत्रता, कड़ी मेहनत, त्याग अति आवश्यक तत्व हैं । इनके परिणाम हमेशा साकारात्मक ही होते हैं । इसके साथ-साथ आप उन दिनों को भी याद करें जब आपको विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ा था । इन दोनों अच्छे -बुरे दौर को याद करने के बाद आपको ये बात स्पष्ट हो जाएगी कि अमुक परिस्थितियां आपके लिए अच्छा है और अमुक बुरा । अब आपको ये करना है कि आप कोशिश करें कि वैसी परिस्थितयां दोबारा ना आए जो आपको हित में नहीं है । आप जरुर सोच रहे होंगे कि ये परिस्थितयां आप ने नहीं पैदा किया था फिर इन पर नियंत्रण कैसे संभव है । आपका सोचना सही है कि प्रकृति प्रदत्त परिस्थितियों से कैसे निपटे । आप देखेंगे कि ज्यादातर नाकारात्मक परिस्थितियां मानव निर्मित होती हैं । एकाध ही वैसी परिस्थिति होगी जिसे आप नियंत्रित नहीं कर पाएंगे । उन एकाध को ईश्वर की इच्छा की मानकर छोड़ दें । बाकी सभी को आप नियंत्रित कर सकते हैं । इतना ही आप के लिए काफी है ।जब आप ऐसा करना शुरु करेंगे तो आप देखेंगे कि आपका अपने प्रति विश्वास बढ़ता जा रहा है । और तब आपको अपनी मनचाहा परिणाम प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता है । आप वो सब करें जिसे करने में आपको खुशी मिलती है ।
आप चाहे नौकरी करते हों या व्यापार , जीवन यात्रा में मददगार इन उपायों का अगर आपने सही तरीके से उपयोग किया तो कोई कारण नहीं है कि आप मंजिल से अछूता रह जाए ।
Wednesday, February 24, 2021
सफलता के मूल मंत्र
आज प्रत्येक व्यक्ति सफल होने के लिए ना जाने क्या-क्या जतन करता है । इसी सन्दर्भ में इस लेख के माध्यम से आपको सफलता के मूलमंत्र के बारे में बताया गया है , जिसका अनुसरण सफलता की गारंटी है ।
सफल होने के कई तरीके हो सकते हैं । इस लेख के माध्यम से आप जानेंगे कि सफलता के तीन मूलमंत्र हैं, जिन्हे आप अगर आत्मसात कर लें तो सफलता आपके कदम अवश्य चूमेगी ।
जब आप लोगों से इस बारे में पूछेंगें तो आपको सफलता के सूत्र के बारे में अलग-अलग उत्तर मिलेंगे। मगर सच्चाई यह है, सफलता अपनी पहचान खुद बनाती है और आप उस क्षेत्र में जल्दी सफलता प्राप्त कर सकते हैं जिस विषय में आप की जानकारी और तैयारी जबरदस्त हो । जानकारी प्राप्त करना और तैयारी करना सरल और सामान्य चीज है । इसके कुछ खास तौर तरीके हैं जो बेहद सरल हैं लेकिन ज्यादातर लोग बस उनका अनुसरण नहीं करते हैं।
मेरा सबसे पसंदीदा उद्धरणों में से एक है कि, "सफलता का कोई रहस्य नहीं है"। यह तो बेहतर रणनीति, कठिन परिश्रम और अपनी असफलताओं से प्राप्त अनुभव का प्रतिफल है ।
जैसा कि इस उद्धरण में साफ कहा गया है कि आपको अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए तीन प्रमुख कारकों को अपने नजर के सामने हमेशा बनाए रखना होगा ।
प्रथम -योजना अथवा तैयारी ः
आपको हर चीज़ के सही होने का इंतज़ार नहीं करना है । आप ऐसा नहीं सोंचे कि परिस्थितियां जब बेहतर होगी तब सफलता अपने आप मिल जाएगी। ऐसा सोच कर आप अपना समय बर्बाद बिलकुल नहीं करें । याद रखें कि सफलता रातो रात कभी नहीं मिलती है । इसके लिए आपको अपने आप को तैयार करना होता है ।
सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहला मूल मंत्र है तैयारी , तैयारी और बेहतर तैयारी । किसी काम में आपकी सफलता सबसे अधिक इस बात पर निर्भर करता है कि काम करने के लिए आपकी तैयारी कैसी है । बेहतर तैयारी आपकी सफलता की गारंटी है । अपनी दृष्टि को अर्जुन की भांति अपने लक्ष्य पर टिकाये रखें । आप जिसे प्राप्त करना चाहते हैं, उसे अपनी नजर से कभी ओझल होने नहीं दें । सोते जागते केवल अपने लक्ष्य के बारे में ही सोचें । और इसे प्राप्त करने के बेहतर तरीकेों पर निगाह जमाए रखें , फिर आप देखेंगे कि सफलता आपके दरवाजे पर दस्तक दे रहा होगा l
द्वितीय- कड़ी मेहनत ः
काम कि तैयारी अथवा एक बेहतर रणनीति बना लेने के बाद आपको उसे पूरा करने के लिए तन-मन-धन से कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। फिर कोई कारण नहीं है कि सफलता आपके कदम ना चूमे । यकीन मानिए कड़ी मेहनत आपको कभी निराश नहीं करेंगी । अंग्रेजी में एक कहावत है -There is no shortcut to success. अर्थात सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है । ये बात बिलकुल सही है । इतिहास में आज तक जितने भी महान इंसान हुए उनकी सफलता का मंत्र उनका लगन और कठिन परिश्रम ही रहा । अतएव एक बार योजना बना लेने के बाद उसे प्राप्त करने के लिए ऐड़ी चोटी एक कर दें । फिर आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आपका काम बनता नजर आएगा और अंततः आप सफल होंगे ।
तीसरा -अपनी विफलता से सीख ः
सफल लोग अपनी असफलताओं को असफलता के रूप में नहीं देखते हैं। वे उन्हें सीखने के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखते हैं। एक ऐसे सबक के रूप में देखते हैं जो उन्हें ऐसी गलतियों को दोबारा होने से रोकने के लिए एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है । प्रत्येक विफलता को सीखने के एक सबक या अवसर में बदलने की इस मानसिकता को अपनाने से, आप कभी भी असफल नहीं हो सकते । जरुरत है आप अपनी पिछली असलताओं के कारण को ढ़ूढ़े और कोशिश करें की वो गलती दोबारा नहीं हो । इसका मतलब साफ है कि अब आपकी गलतियां कम होंगी और सफलका की संभावना बढ़ती जाएगी ।
निष्कर्ष के तौर पर मैं यही कह सकता हूँ कि आपकी बेहतर रणनीति, कड़ी मेहनत और अपनी असफलताओं से मिली सीख आपके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का मूलमंत्र है।
Wednesday, March 9, 2011
हर साल की तरह इस साल भी आठ मार्च को महिला दिवस मनाने की औपचारिकता पूरी कर दी गई ।देश भर में कई तरह के कार्यक्रम और सम्मेलन हुई । हर जगह महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को और सशक्त बनाने की बात की गई ।प्रयास अच्छे थे । पर महिलाओं से संबंधित सबसे संवेदनशील मामले पर उस तरह की बहस नहीं की गई जिसकी जरुरत है । वह है कन्या भ्रूण हत्या पर पूर्णतया रोक कैसे लगाया जाए ।यह जगजाहिर है कि जिस तरह से देश में लिंगानुपात में कमी आती जा रही है उससे तो यही लगता है कि एक दिन इस धरा से नारी का खात्मा ही हो जाएगा । आपको यह बात आज आपको अटपटा लग सकता है पर अगर समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो ऐसा संभव हो सकता है ।मगर यक्ष प्रश्न यह है कि इस समस्या का समाधान कैसे हो । सरकार ने कानून भी बना दिया है ,लिंग परीक्षण आज गैरकानूनी है ।फिर भी लोग कन्या भ्रूण हत्या से बाज नहीं आ रहें हैं आखिर क्या है इसका वास्तविक समाधान ?जनचेतना के लिए भी कई गैरसरकारी संगठन आज दिन रात काम कर रहें हैं पर परिणाम सिफर ही है ।इस समस्या का वास्तविक समाधान क्या हो इसके लिए और क्या क्या किया जा सकता है आप बुद्धिजीवियों से इस गंभीर विषय पर बहस की अपेक्षा है ।
Thursday, June 25, 2009
गंदगी पर हताशा
शीला दीक्षित के इस बयान से बड़ी निराशा हुई जब उन्होने कहा कि यमुना नदी की सफाई संभव नहीं है । यह बयान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की मुखिया का है । जिनके पास सरकार के सारे संसाधन और प्रशासनिक मशीनरी है । वही जब ऐसा कहेंगी तो आम इंसान तो बिल्कुल हताश हो जाएगा । आखिर जनता ने लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए उन्हें मुख्यमंत्री ये बात सुनने के लिए नहीं बनाया है । बल्की सरकार से ढ़ेर सारी अपेक्षाएं हैं । शीला दीक्षित कहती हैं कि यमुना आज एक नाले में तब्दील हो चुका है । मैं पूछना चाहता हूं कि इसके लिए जिम्मेवार कौन है । पिछले दस सालों में दिल्ली की सरकार ने यमुना की सफाई के नाम पर जितना पैसा बहाया वह कहां गया । आखिर इसका हिसाब कौन देगा । जनता की गाढी कमाई का पैसा यमुना को नाले में तब्दील होने से रोक न सका । इसके लिए कहीं न कहीं सरकार भी दोषी है । ये कह देने से की अभी यमुना की सफाई नहीं हो सकती शीला जी अपनी जिम्मेवारी से बच नहीं सकतीं । मुख्यमंत्री खुद यह मानती हैं कि दिल्ली का 57 फीसदी कचरा यमुना नदी में डाला जाता है ।साथ ही प्रतिदिन तीन हजार लीटर से अधिक सीवर का गंदा पानी भी यमुना में फेंका जाता है । आखिर इन कचरों और गंदे पानी को रोकने की व्यवस्था का उत्तरदारयित्व किस पर है । केवल यमुना को साफ करने की चिंता करने से तो यमुना साफ होने से रही । जरुरत है इसके लिए ठोस कदम उठाने की । यमुना नदी की सफाई की बात छोड़ दें तो शीला सरकार ने दिल्ली को सजाने संवारने में कोई कोर कसर छोड़ नहीं रखी है । फिर क्या वजह है कि यमुना की सफाई संभव नहीं । जो भी सरकारी अधिकारी यमुना एक्शन प्लान के लिए जिम्मेवार है उऩसे इसका जवाब मांगा जाए कि आखिर करोडों अरबों खर्च करने के बाद भी यमुना गंदी ही क्यों है ।इसके साथ ही एक समय सीमा निर्धारित कर इसके सफाई की व्यवस्था की जाए । यमुना की सफाई में जहां भी कोताही बरती जा रही है वहां के अधिकारियों की खबर ली जाए । अगर सरकार गंभीरता से कोशिश करे तो कोई कारण नहीं है कि किसी भी समस्या का समाधान संभव नहीं है । वैसे भी अगले साल दिल्ली मे कॉमनवेल्थ गेम्स होने हैं ऐसे में क्या हम अपने विदेशी अतिथियों का स्वागत गंदी यमुना से करेंगे । ये वक्त है युद्ध स्तर पर काम करने की हताश होने की नहीं ।
Tuesday, June 23, 2009
माओवादियों पर पाबंदी
देर से ही सही आखिरकार केंद्र सरकार ने नक्सली संगठन भाकपा {माओवादी} प्रतिबंधित संगठन की सूची में डालकर एक अच्छा कदम उठाया है । वैसे कोई संगठन जो देश हित और आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन गया हो उस पर पाबंदी लगनी ही चाहिए । पर क्या किसी संगठन को आतंकी संगठन की सूची में डाल देने से उसपर नियंत्रण किया जा सकता है नहीं । एक और बात मेरी समझ में नहीं आती है कि यह प्रतिबंध पांच साल पहले ही क्यों नहीं लगाया गया जब भाकपा माले और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर 2004 में एक होकर भाकपा माओवादी बन गए। चलिए देर से ही सही सरकार जागी तो सही।अब ये तो समय ही बताएगा कि यह प्रतिबंध कितना कारगर साबित होगा । अब जरुरत है एक ठोस रणनीति बनाने की ।आज भाकपा माओवादी सहित कुछ और नक्सली संगठन केंद्रीय सुरक्षा बलों को सीधी चुनौती देने में लगा है ऐसे उनपर शिकंजा कसने के लिए केवल प्रतिबंध लगाने से काम नहीं चलेगा । किसी भी नक्सली संगठन में नेता लोग बहला फुसला कर भोले भाले लोगों को अपने साथ जोड़ लेते हैं। ये भोले भाले लोग नक्सली नेताओं के मनसूबों को समझ नहीं पाते ।इनके नेताओं को समस्या के समाधान से कोई लेना देना नहीं होता ये तो बस अपनी रोटी सेंकने से मतलब रखते हैं । ऐसे में जरुरत है दो तरह की रणनीति बनाने की । नक्सली नेताओं को गिरफ्तार करें या फिर पुलिस उनकी गोली का जवाब गोली से दे । साथ ही साथ उनके भोले भाले अनुयाय़ियों को समझा बुझा कर संगठन से अलग करने की कोशिश करें । हालांकि यह काम उतना आसान नहीं है । इसके लिए सरकार के इंटेलिजेंस के लोगों को उनके बीच भेजने की आवश्यकता है ।जो भी लोग वहां भेजे जाएँ वो उनके बीच के ही हों । ताकि उन्हें कोई शक नहीं हो ।ज्यादातर लोग अमन और शांति से दो रोटी की तलाश में रहते हैं । खून खराबा कोई नहीं चाहता ।ऐसे में एक सोची समझी पुनर्वास कार्यक्रम चलाकर भोली भाली बहुसंख्यक जनता को इन नक्सलियों के चंगुल से छुड़ाया जा सकता है ।एक खास बात और है सरकार जब भी ऐसा कोई कार्यक्रम बनाए क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही योजना बनाए । क्योंकि पूरे देश के स्तर पर एक योजना नहीं बनाई जा सकती । भले नक्सली आंदोलन के मूल में पिछड़ापन हो मगर जो परिस्थितियां बिहार की है वह आंध्रप्रदेश की नहीं । ऐसे में क्षेत्रीय आधार पर अलग -अलग योजना बनाने की जरुरत है । कोई भी योजना बनाई उसमें केंद्र एवं राज्य स्तर पर समन्वय अति आवश्यक है ।ऐसा नहीं होता है तो केंद्रीय सरका कितनी भी अच्छी योजना बना दे राज्य स्तर पर राजनीति होती रहेगी ।
Sunday, September 7, 2008
बिहार में बाढ़
बाढ़ जरुरी है...
आजकल पूरा उत्तरी बिहार बाढ़ की चपेट में है...चारों ओर कोहराम मचा है ...लगता है जैसे कोसी मैया सबकुछ अपने में समा लेना चाहती है...कितने मरे कितने कितने बचे हैं किसी को ठीकठाक पता नहीं है...बाढ़ की विकराल हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूबे के मुख्यमंत्री ने जब बाढ़ क्षेत्रों का दौरा किया तो उनके मुंह से अनायास ही निकल गया कि ये बाढ़ नहीं प्रलय है.... सरकार के लिए अभी सबसे बड़ी चिंता है कि बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक कैसे पहुंचाया जाए...राहत पहुंचाने के काम में राज्य सरकार के नुमाइंदों के साथ साथ सेना के तीनों अंग भी जीजान से जुटे हुए हैं ...केंद्र सरकार ने बाढ़ राहत के नाम पर एक हजार करोड़ की फौरी सहायता की घोषणा कर चुकी है...खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बाढ़ से घिरे इलाके का दौरा कर चुके है...बाढ़ की विभीषिका देख कर मनमोहन सिंह ने सबा लाख टन अनाज देने की भी घोषणा की है...कई राज्य सरकारों ने भी अपने अपने तरीके से सहायता की पेशकश की है...हर कोई इस महाविपदा की घड़ी में जैसे बन पा रहा है सहायता कर रहा है...हर साल उत्तरी बिहार में बाढ़ आता पर आज तक इसके रोकथाम की कोई स्थाई उपाय नहीं किए जा सके हैं...मजेदार बात ये भी है कि जिस बिहार ने कई आंदोलनों को जन्म दिया है वहां कभी बाढ़ की रोकथाम के लिए जनता की ओर से कोई आंदोलन नहीं किया गया है...ये वही बिहार है जहां अपने अपने दलों को जीताने के लिए के लिए लोग लड़ने मरने को लोग तैयार रहते हैं...मगर आज तक किसी ने भी बाढ़ की समस्या के समधान के लिए सरकार को घेरने की कोशिश नहीं की है...ज्यादातर लोग बाढ़ को बिहार की नियति मान चुके हैं और इसी में जीने की आदत डाल चुके हैं ...ऐसे लोगों सहायता कौन कर सकता है जो खुद अपनी सहायता करने को तैयार नहीं हैं.....खैर अभी ढ़ोल पीटने का सही समय नहीं है ...वक्त का तकाजा है कि लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जाए...राहत का दौर चल ही रहा है और साथ ही राजनीति भी चल रही है...राज्य सरकार का आरोप है कि बाढ़ आने से पहले ही केन्द्र सरकार को बता दिया था कि कोसी के तटबंध को खतरा है...पर समय रहते केन्द्र सरकार ने मदद नहीं किया जिससे हालात खराब हो गए...कोसी नदी का तटबंध टूटा 18 अगस्त को और देखते ही देखते उत्तरी बिहार के 14 जिलों को अपने आगोश मे ले लिया ...दरअसल 8 अगस्त को ही कोसी तटबंध में दरार पड़ गया था...राज्य सरकार ने तुरंत ही इंजीनियरों की एक टीम भेजकर इस दरार को दुरुस्त करवा दिया ...पर नेपाल की सीमा पर रहने वाले नेपाली लोगों ने इनके साथ सहयोग नहीं किया ...नतीजा तटबंध की मरम्मत पूरी तरह से नहीं हो पाया...दस दिनों बाद ही कोसी ने अपना कहर दिखा दिया ...जिसकी चेतावनी हर साल दी जाती है...इस बार तो कोसी मैया हद कर दी ....कह जा रहा है कि कोसी तटबंध को तोड़कर अपनी धारा बदल दी है ...करीब दो सौ साल पहले जहां कोसी नदी बहती थी आज उसी धारा में बह रही है...हालात बद से बदतर होती जा रही है...कई ऐसे इलाके भी इस साल बाढ़ की चपेट में आ गए हैं...जहां पहले बाढ़ नहीं आता था...एक तरफ बाढ़ से लोग मर रहें हैं तो दूसरी ओर कुछ लोग बाढ़ के खेल का मजा लेने की व्यूहरचना कर रहें हैं...एक ओर कोसी की धारा बह रही है तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार की गंगा भी बहने लगी है ...ये अलग बात है कि इसका पता तो शायद बाद में चलेगा कि कितने गौतम गोस्वामी इस बार करोड़पति बनते हैं ...पर राहत कार्यों को देखकर तो ऐसा ही लगता है कि मंत्री हों या सरकारी अमले कोई भी इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने देना नहीं चाहते ...बादे तो बड़े बड़े किए जा रहें हैं ...पर नतीजा वही ढाक के तीन पात...खैर इन सबके बीच जो एक बहुत ही अच्छी चीज उभरकर सामने आई है वह है ...बाढ़ से घिरे लोगों में गजब की एकता देखी जा सकती है ...ये वही बिहार है जहां चुनाव के समय लोग जाति और धर्म के नाम पर एक दूसरे का खून कर देने से भी नहीं हिचकिचाते ...वहीं आज सभी एकजुट होकर एक दूसरे की मदद कर रहें हैं...बाढ़ में डूब रहे लोगों से आज कोई उसकी जाति और धर्म नहीं पूछ रहा है...बस डूब रहे लोगों को बचाना ही सबका धर्म बन गया है...चलिए कुछ तो सही हो रहा है जो हमारे देश के नेता नहीं कर पा रहें हैं वह बाढ़ ने ही कर दिखाया...यह देखकर मन करता है कि बिहार में बाढ़ जरुरी है ...सबकुछ छीनकर भी बाढ एक ऐसी चीज बिहार वासियों को देकर जाती है जिसकी जरुरत सबसे ज्यादा है...वह है समाज में एका की भावना ...अगर हमारा समाज जाति ,धर्म , ऊंच नीच भूलकर बिहार के विकास की बात सोचने लगे तो शायद किसी भी समस्या का स्थाई समाधान संभव है....
आजकल पूरा उत्तरी बिहार बाढ़ की चपेट में है...चारों ओर कोहराम मचा है ...लगता है जैसे कोसी मैया सबकुछ अपने में समा लेना चाहती है...कितने मरे कितने कितने बचे हैं किसी को ठीकठाक पता नहीं है...बाढ़ की विकराल हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूबे के मुख्यमंत्री ने जब बाढ़ क्षेत्रों का दौरा किया तो उनके मुंह से अनायास ही निकल गया कि ये बाढ़ नहीं प्रलय है.... सरकार के लिए अभी सबसे बड़ी चिंता है कि बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक कैसे पहुंचाया जाए...राहत पहुंचाने के काम में राज्य सरकार के नुमाइंदों के साथ साथ सेना के तीनों अंग भी जीजान से जुटे हुए हैं ...केंद्र सरकार ने बाढ़ राहत के नाम पर एक हजार करोड़ की फौरी सहायता की घोषणा कर चुकी है...खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बाढ़ से घिरे इलाके का दौरा कर चुके है...बाढ़ की विभीषिका देख कर मनमोहन सिंह ने सबा लाख टन अनाज देने की भी घोषणा की है...कई राज्य सरकारों ने भी अपने अपने तरीके से सहायता की पेशकश की है...हर कोई इस महाविपदा की घड़ी में जैसे बन पा रहा है सहायता कर रहा है...हर साल उत्तरी बिहार में बाढ़ आता पर आज तक इसके रोकथाम की कोई स्थाई उपाय नहीं किए जा सके हैं...मजेदार बात ये भी है कि जिस बिहार ने कई आंदोलनों को जन्म दिया है वहां कभी बाढ़ की रोकथाम के लिए जनता की ओर से कोई आंदोलन नहीं किया गया है...ये वही बिहार है जहां अपने अपने दलों को जीताने के लिए के लिए लोग लड़ने मरने को लोग तैयार रहते हैं...मगर आज तक किसी ने भी बाढ़ की समस्या के समधान के लिए सरकार को घेरने की कोशिश नहीं की है...ज्यादातर लोग बाढ़ को बिहार की नियति मान चुके हैं और इसी में जीने की आदत डाल चुके हैं ...ऐसे लोगों सहायता कौन कर सकता है जो खुद अपनी सहायता करने को तैयार नहीं हैं.....खैर अभी ढ़ोल पीटने का सही समय नहीं है ...वक्त का तकाजा है कि लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जाए...राहत का दौर चल ही रहा है और साथ ही राजनीति भी चल रही है...राज्य सरकार का आरोप है कि बाढ़ आने से पहले ही केन्द्र सरकार को बता दिया था कि कोसी के तटबंध को खतरा है...पर समय रहते केन्द्र सरकार ने मदद नहीं किया जिससे हालात खराब हो गए...कोसी नदी का तटबंध टूटा 18 अगस्त को और देखते ही देखते उत्तरी बिहार के 14 जिलों को अपने आगोश मे ले लिया ...दरअसल 8 अगस्त को ही कोसी तटबंध में दरार पड़ गया था...राज्य सरकार ने तुरंत ही इंजीनियरों की एक टीम भेजकर इस दरार को दुरुस्त करवा दिया ...पर नेपाल की सीमा पर रहने वाले नेपाली लोगों ने इनके साथ सहयोग नहीं किया ...नतीजा तटबंध की मरम्मत पूरी तरह से नहीं हो पाया...दस दिनों बाद ही कोसी ने अपना कहर दिखा दिया ...जिसकी चेतावनी हर साल दी जाती है...इस बार तो कोसी मैया हद कर दी ....कह जा रहा है कि कोसी तटबंध को तोड़कर अपनी धारा बदल दी है ...करीब दो सौ साल पहले जहां कोसी नदी बहती थी आज उसी धारा में बह रही है...हालात बद से बदतर होती जा रही है...कई ऐसे इलाके भी इस साल बाढ़ की चपेट में आ गए हैं...जहां पहले बाढ़ नहीं आता था...एक तरफ बाढ़ से लोग मर रहें हैं तो दूसरी ओर कुछ लोग बाढ़ के खेल का मजा लेने की व्यूहरचना कर रहें हैं...एक ओर कोसी की धारा बह रही है तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार की गंगा भी बहने लगी है ...ये अलग बात है कि इसका पता तो शायद बाद में चलेगा कि कितने गौतम गोस्वामी इस बार करोड़पति बनते हैं ...पर राहत कार्यों को देखकर तो ऐसा ही लगता है कि मंत्री हों या सरकारी अमले कोई भी इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने देना नहीं चाहते ...बादे तो बड़े बड़े किए जा रहें हैं ...पर नतीजा वही ढाक के तीन पात...खैर इन सबके बीच जो एक बहुत ही अच्छी चीज उभरकर सामने आई है वह है ...बाढ़ से घिरे लोगों में गजब की एकता देखी जा सकती है ...ये वही बिहार है जहां चुनाव के समय लोग जाति और धर्म के नाम पर एक दूसरे का खून कर देने से भी नहीं हिचकिचाते ...वहीं आज सभी एकजुट होकर एक दूसरे की मदद कर रहें हैं...बाढ़ में डूब रहे लोगों से आज कोई उसकी जाति और धर्म नहीं पूछ रहा है...बस डूब रहे लोगों को बचाना ही सबका धर्म बन गया है...चलिए कुछ तो सही हो रहा है जो हमारे देश के नेता नहीं कर पा रहें हैं वह बाढ़ ने ही कर दिखाया...यह देखकर मन करता है कि बिहार में बाढ़ जरुरी है ...सबकुछ छीनकर भी बाढ एक ऐसी चीज बिहार वासियों को देकर जाती है जिसकी जरुरत सबसे ज्यादा है...वह है समाज में एका की भावना ...अगर हमारा समाज जाति ,धर्म , ऊंच नीच भूलकर बिहार के विकास की बात सोचने लगे तो शायद किसी भी समस्या का स्थाई समाधान संभव है....
Friday, June 27, 2008
1983 के हीरो
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 25 जून 1983 का दिन सुनहरे पन्ने में दर्ज है...इस दिन भारत ने वेस्ट इंडिज को वल्र्ड कप फाइनल में पटकनी देकर क्रिक्रेट की दुनिया में उसकी बादशाहत को चुनौती दी थी...वैसे तो पूरे टुर्नामेंट के दौरान हर खिलाड़ी ने अपना किरदार बखूबी निभाया था ..पर कुछ नाम ऐसे हैं जिनके बगैर विश्व विजेता बनने की राह आसान नहीं थी...आइए टीम इंडिया को वल्र्ड चैंपियन बनवाने में अहम भूिमका निभाने वाले पांच स्टार क्रिक्रेटरों के परफॉर्मेंस पर नजर डालते हैं ...सबसे पहले बात कपिलदेव की ...कपिल ने अपनी कप्तानी और हरफनमौला खेल से सबका दिल जीत लिया था ...उन्होने अपनी टीम के लिए संकटमोचन की भूमिका निभाई थी..जिंबाब्वे के खिलाफ उनकी 175 रन की पारी का तो हर कोई कायल है ...अकेले दम पर कपिल ने भारतीय टीम की नैया पार लगाई थी ...और इस पारी के लिए कपिल मैन ऑफ दी मैच भी चुने गए थे... कपिल ने 60.60 के औसत और 109 के स्ट्राइक रेट से भारत के लिए सबसे अधिक 303 रन बनाए थे ..गेंदबाजी में 20.41 के औसत से 12 विकेट भी उनके खाते में दर्ज है ..इतना ही नहीं उन्होने सात कैच भी लपके थे ...जिसमें विवियन रिचर्डस का वो शानदार कैच भी शामिल था जो फाइनल मैच का टर्निग पॉइंट साबित हुआ ...कपिल ने खुद के प्रदर्शन से साथी खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल कायम की थी ... ....स्टार खिलाड़ियों में दूसरा नाम है मोहिंदर अमरनाथ का ...फाइनल और सेमिफाइनल दोनो में मैन ऑफ द मैच रहे थे अमरनाथ ...सेमिफाइनल में इंगलैंड के खिलाफ बहुमूल्य 46 रन बनाए थे और साथ ही दो अहम विकेट भी लिए थे ....फाइनल में वेस्ट इंडिज के खिलाफ उन्होने अपन ऑलराउंड खेल से भारत को विश्व विजेता बनाने में अहम किरदार निभाया था ...जिसमें बेशकीमती 26 रन और तीन विकेट भी शामिल हैं..अमरनाथ ने 30 की औसत से 237 रन बनाए जिसमें 80 रन उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा था...गेंदबाजी में उन्होने 22.25 की औसत से आठ विकेट चटकाए थे.... ......एक और होनहार हरफनमौला खिलाड़ी हैं मदन लाल ...जिंबाब्वे के खिलाफ अपनी घातक गेंदबाजी से इस खिलाड़ी ने भारत को जीत दिला दी ....इस मैच में किफाइती बॉलिंग करते हुए मदन लाल ने तीन कीमती विकेट चटकाए ..इस मैच में मैन ऑफ द मैच रहे मदन लाल ने कई बार अपनी उपयोगिता साबित की ...और बल्लेबाजी में भी जब मदन को मौका मिला उन्होन अपना हुनर दिखाया ..गेंदबाजी में 16.76 के औसत से मदन ने 17 विकेट झटके ...जबकि बल्लेबाजी में 34 के औसत से 102 रन बनाए थे ......अब बात यशपाल शर्मा की जिसने पहले मैच में अपन बल्ले का रंग दिखाया था ...विश्व कप 1983 में भारत के सामने पहले ही मैच में उस समय की सर्वश्रेष्ठ टीम यानि कि वेस्ट इंडिज थी....इसी मैच में यशपाल ने बेहतरीन 89 रन की पारी खेली थी ...इस पारी ने ही भारत की जीत की नींव रखी थी ...पूरे विश्व कप टूर्नामेंट के दौरान यशपाल एक भरोसे के बल्लेबाज साबित हुए थे....सेमिफाइनल में भी यशपाल ने 61 रनों की शानदार पारी खेली थी .....पूरे विश्व कप में इनकी बल्लेबाजीका बोलबाला रहा....उन्होने 34.28 के औसत से 240 रन बटोरे .........अब बात एक ऐसे हीरो की जिसने अपने तूफानी गेंदबाजी से विपक्षी बल्लेबाजों को कभी जमने नहीं दिया ......ये हैं रोजर बिन्नी ... भारत की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट इसी गेंदबाज के खाते में रहे ...ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रोजर की घातक गेंदबाजी के आगे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने घुटने टेक दिए थे ...और भारत के लिए सेमिफाइनल का दरवाजा खुल गया ....इस मैच में उन्होने चार विकेट चटकाए ....इसके लिए उन्हे मैन ऑफ द मैच के पुरस्कार से नवाजा गया ....जब भी टीम को विकेट की जरुरत पड़ी कप्तान ने इस गेंदबाज को याद किया ....और रोजर ने भी अपन कप्तान को भरोसे को कभी टूटने नहीं दिया ....18.66 के औसत से रोजर बिन्नी ने कुल 18 विकेट झटके थे ....पूरे टुर्नामेंट के दौरान बिन्नी के इस स्विंग गेंदबाजी के आगे सभी बल्लेबाज जूझते नजर आए ........इन्ही रणवांकुरों ने भारत को विश्व का सरताज बनाया ...इन्हें लख लख सलाम...
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