महंगाई एक फिर अपने चरम पर है... सरकार परेशान है... हो भी क्यों नहीं चुनावी वर्ष जो ठहरा... आंकड़े बताते हैं कि मुद्रास्फिती 7.33 प्रतिशत पर है...पर असल महंगाई तो लगता है कि सारे रिकॉर्ड तोड़ देने को बेकरार है...एक बार फिर रिजर्व बैंक ने सी.आर. आर. में बढ़ोतरी कर और सरकार ने वायदा कारोबार पर रोक,
आयात शुल्क में कटौती, निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी कर अपनी कर्त्तव्य की पूर्ति कर दी है ..अब चाहे महंगाई घटे या बढे सरकार को क्या फर्क पड़ता है...उसने तो जो करना था कर दिया अब लोगों का भाग्य ....हर बार जब भी महंगाई बढ़ती है...रिजर्व बैंक और सरकार दोनों काफी परेशान हो जाते हैं ...एक मुहिम शुरू होती है...बैंक दर कम किया जाता है...सी.आर.आर. बढाया जाता है...सरकार भी और संसद भी परेशान से दिखने लगते हैं ...लगता है कि इस बार महंगाई जरूर कम हो जाएगी ...पर शायद ही कभी ऐसा हो पाता है...पढे लिखे लोग तो समझ भी जाते हैं कि हां भई सरकार ने तो अपनी ओर से कोशिश कर दी है ...पर सीधे सादे हमारे गांवों के साठ फीसदी कभी समझ भी नहीं पाते कि आखिर सरकार ने महंगाई रोकने के लिए किया क्या...उन्हे तो कभी महंगाई कम होती दिखती नहीं...सरकार आंकडों के खेल में उलझी रहती है और भोलीभाली जनता भगवान के भरोसे बैठी रहती है....खैर इन बातों को जाने दिजिए ....आश्चर्य तो तब होता है जब इतने के बावजूद ज्यादातर लोग चुप ही रहते हैं...आखिर इसका इलाज क्या है ....खाद्यान्न भंडारों में अनाज सड़ रहा है...वहीं दूसरी ओर लोग भूखे मर रहें हैं ...ये क्या है ...किस तरह की व्यवस्था है....आखिर कौन है जिम्मेवार लोगों को राटी देने के लिए...अभी कल की बात है इंडिया गेट पर करीब सौ सांसद जमा हुए ...ये सांसद काफी गंभीर दिख रहे थे....मुद्दा था देश में बच्चों में बढ़ते कुपोषण का ...इस महान कार्य के लिए सभी सांसद दलीय मतभेदों को भुलाकर एक स्वर में बोलते नजर आए ...अगर ये मुहिम जारी रहती है तो कोई कारण नहीं है कि कुपोषण की समस्या पर काबू नही पाया जाए...जरूरत है इस आगाज को अंजाम तक पहुंचाने की ....मगर आज लगभग सभी दल महंगाई के नाम पर सिर्फ राजनीति ही कर रही है...अभी हाल में दिल्ली में कई स्थानों पर एक ही साथ छापेमारी कर हजारों टन अनाज पकड़ा गया ...मगर खास बात यह है कि इसमें किसी की गिरफ्तारी नहीं हुइ...पर सरकार गंभीर है ...आखिर उसने कोशिश तो की ......
Wednesday, April 30, 2008
Wednesday, April 23, 2008
परिचय
मेरा नाम गोपी कृष्ण सहाय है...पेशे से पत्रकार हूं...पत्रकार ....आज पत्रकारिता जगत में ये बहस आम हो चला है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने पत्रकारिता के स्तर को नीचे कर दिया है...पर जो लोग इस तरह की बातें करते हैं उनका ध्यान मैं इस ओर खींचना चाहूंगा.....सबसे पहले तो मैं यह स्पष्ट कर दूं कि हर नए विधा को दुनिया में पैर जमाने में वक्त तो लगता ही है....और जहां तक भारत की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की बात है तो यह तो अभी अपने शैशवावस्था में है .....अतएव इसे पहले अपने पैरों पर तो खड़ा होने दें फिर करेगे आपनलोग मिलकर समालोचना....यह बात तो सबको पता है कि भारत मे जब अखबार की शुरूआत हुई थी तब कई लोगों की यही राय थी ....खासकर हिन्दी समाचार पत्रों को तो अपने अस्तित्व बचाए रखने के लिए खासा मशक्कत करनी पड़ी थी ॥पर आज भारत की प्रिन्ट मीडिया अपने पैरों पर खड़े होकर खासी विश्बसनियता अर्जित कर चुकी है......आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी लोगों की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके सामने पहले से कोइ उदाहरण नहीं है....ऐसा उदाहरण जो हमारी संस्कृति से मेल खाती हो......ऐसी स्थिति में भारत के वैसे पत्रकार जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम कर रहें हैं वे एक साथ ही छात्र भी हैं और शिक्षक भी ....अर्थात वे खुद भी सीख रहे हैं.....और एक प्रतिमान भी स्थापित करना चाहते हैं ताकि आने वाली पीढी उसका अनुसरण कर सकें... आर एण्ड डी के इस दौर में कई मर्तबा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं जिसे पुरानी पीढ़ी के पत्रकारों के लिए पचाना मुश्किल हो जाता है....जरूरत है उन लोगों को आगे आकर सुधार प्रक्रिया मे हिस्सा लेने की....वरना पत्रकारिता की ये नई पौध उगने से पहले ही मुरझा जाएगी.....
शांति की खोज
यह घटना उन दिनों की है जब सिकंदर महान पूरे विश्व को जीतने की राह पर था ....एक दिन उसने देखा उसके खेमे के बाहर एक आदमी निश्चिंतता पूर्वक सोया हुआ था॥दूसरे दिन भी वह व्यक्ति उसी तरह सोया हुआ था....अब सिकंदर से रहा नहीं गया उसने उस आदमी को जगाने का आदेश दिया .....सिकंदर के सिपाहियों ने तुरंत उसे जगाकर सिकंदर महान के सामने हाजिर किया ....सिकंदर ने उस व्यक्ति से पूछा कि भाई तुम लगातार दो दिनों से क्यों सो रहे हो ......उस व्यक्ति ने सिकंदर से पूछा तुम कौन हो और क्या करते हो ॥सिकंदर ने बताया कि मैं सिकंदर महान हूं और पूरे विश्व को जीतना चाहता हूं......फिर उस व्यक्ति ने पूछा कि उसके बाद क्या करोगे.......तो सिकंदर ने कहा कि उसके बाद आराम करूंगा.......इस पर उस व्यक्ति ने कहा कि मैं भी आराम कर रहा हूं...इस कहानी का सार यह है कि शांति के लिए किसी खास उपलब्धी का इन्तजार बेकार है....आप जैसे भी हैं खुश रहें.....सफलता अपनी जगह है और शांति अपनी जगह....
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