Wednesday, April 30, 2008

एक और कोशिश

महंगाई एक फिर अपने चरम पर है... सरकार परेशान है... हो भी क्यों नहीं चुनावी वर्ष जो ठहरा... आंकड़े बताते हैं कि मुद्रास्फिती 7.33 प्रतिशत पर है...पर असल महंगाई तो लगता है कि सारे रिकॉर्ड तोड़ देने को बेकरार है...एक बार फिर रिजर्व बैंक ने सी.आर. आर. में बढ़ोतरी कर और सरकार ने वायदा कारोबार पर रोक,

आयात शुल्क में कटौती, निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी कर अपनी कर्त्तव्य की पूर्ति कर दी है ..अब चाहे महंगाई घटे या बढे सरकार को क्या फर्क पड़ता है...उसने तो जो करना था कर दिया अब लोगों का भाग्य ....हर बार जब भी महंगाई बढ़ती है...रिजर्व बैंक और सरकार दोनों काफी परेशान हो जाते हैं ...एक मुहिम शुरू होती है...बैंक दर कम किया जाता है...सी.आर.आर. बढाया जाता है...सरकार भी और संसद भी परेशान से दिखने लगते हैं ...लगता है कि इस बार महंगाई जरूर कम हो जाएगी ...पर शायद ही कभी ऐसा हो पाता है...पढे लिखे लोग तो समझ भी जाते हैं कि हां भई सरकार ने तो अपनी ओर से कोशिश कर दी है ...पर सीधे सादे हमारे गांवों के साठ फीसदी कभी समझ भी नहीं पाते कि आखिर सरकार ने महंगाई रोकने के लिए किया क्या...उन्हे तो कभी महंगाई कम होती दिखती नहीं...सरकार आंकडों के खेल में उलझी रहती है और भोलीभाली जनता भगवान के भरोसे बैठी रहती है....खैर इन बातों को जाने दिजिए ....आश्चर्य तो तब होता है जब इतने के बावजूद ज्यादातर लोग चुप ही रहते हैं...आखिर इसका इलाज क्या है ....खाद्यान्न भंडारों में अनाज सड़ रहा है...वहीं दूसरी ओर लोग भूखे मर रहें हैं ...ये क्या है ...किस तरह की व्यवस्था है....आखिर कौन है जिम्मेवार लोगों को राटी देने के लिए...अभी कल की बात है इंडिया गेट पर करीब सौ सांसद जमा हुए ...ये सांसद काफी गंभीर दिख रहे थे....मुद्दा था देश में बच्चों में बढ़ते कुपोषण का ...इस महान कार्य के लिए सभी सांसद दलीय मतभेदों को भुलाकर एक स्वर में बोलते नजर आए ...अगर ये मुहिम जारी रहती है तो कोई कारण नहीं है कि कुपोषण की समस्या पर काबू नही पाया जाए...जरूरत है इस आगाज को अंजाम तक पहुंचाने की ....मगर आज लगभग सभी दल महंगाई के नाम पर सिर्फ राजनीति ही कर रही है...अभी हाल में दिल्ली में कई स्थानों पर एक ही साथ छापेमारी कर हजारों टन अनाज पकड़ा गया ...मगर खास बात यह है कि इसमें किसी की गिरफ्तारी नहीं हुइ...पर सरकार गंभीर है ...आखिर उसने कोशिश तो की ......

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