Wednesday, April 23, 2008
परिचय
मेरा नाम गोपी कृष्ण सहाय है...पेशे से पत्रकार हूं...पत्रकार ....आज पत्रकारिता जगत में ये बहस आम हो चला है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने पत्रकारिता के स्तर को नीचे कर दिया है...पर जो लोग इस तरह की बातें करते हैं उनका ध्यान मैं इस ओर खींचना चाहूंगा.....सबसे पहले तो मैं यह स्पष्ट कर दूं कि हर नए विधा को दुनिया में पैर जमाने में वक्त तो लगता ही है....और जहां तक भारत की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की बात है तो यह तो अभी अपने शैशवावस्था में है .....अतएव इसे पहले अपने पैरों पर तो खड़ा होने दें फिर करेगे आपनलोग मिलकर समालोचना....यह बात तो सबको पता है कि भारत मे जब अखबार की शुरूआत हुई थी तब कई लोगों की यही राय थी ....खासकर हिन्दी समाचार पत्रों को तो अपने अस्तित्व बचाए रखने के लिए खासा मशक्कत करनी पड़ी थी ॥पर आज भारत की प्रिन्ट मीडिया अपने पैरों पर खड़े होकर खासी विश्बसनियता अर्जित कर चुकी है......आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी लोगों की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके सामने पहले से कोइ उदाहरण नहीं है....ऐसा उदाहरण जो हमारी संस्कृति से मेल खाती हो......ऐसी स्थिति में भारत के वैसे पत्रकार जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम कर रहें हैं वे एक साथ ही छात्र भी हैं और शिक्षक भी ....अर्थात वे खुद भी सीख रहे हैं.....और एक प्रतिमान भी स्थापित करना चाहते हैं ताकि आने वाली पीढी उसका अनुसरण कर सकें... आर एण्ड डी के इस दौर में कई मर्तबा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं जिसे पुरानी पीढ़ी के पत्रकारों के लिए पचाना मुश्किल हो जाता है....जरूरत है उन लोगों को आगे आकर सुधार प्रक्रिया मे हिस्सा लेने की....वरना पत्रकारिता की ये नई पौध उगने से पहले ही मुरझा जाएगी.....
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment