Wednesday, April 23, 2008

शांति की खोज

यह घटना उन दिनों की है जब सिकंदर महान पूरे विश्व को जीतने की राह पर था ....एक दिन उसने देखा उसके खेमे के बाहर एक आदमी निश्चिंतता पूर्वक सोया हुआ था॥दूसरे दिन भी वह व्यक्ति उसी तरह सोया हुआ था....अब सिकंदर से रहा नहीं गया उसने उस आदमी को जगाने का आदेश दिया .....सिकंदर के सिपाहियों ने तुरंत उसे जगाकर सिकंदर महान के सामने हाजिर किया ....सिकंदर ने उस व्यक्ति से पूछा कि भाई तुम लगातार दो दिनों से क्यों सो रहे हो ......उस व्यक्ति ने सिकंदर से पूछा तुम कौन हो और क्या करते हो ॥सिकंदर ने बताया कि मैं सिकंदर महान हूं और पूरे विश्व को जीतना चाहता हूं......फिर उस व्यक्ति ने पूछा कि उसके बाद क्या करोगे.......तो सिकंदर ने कहा कि उसके बाद आराम करूंगा.......इस पर उस व्यक्ति ने कहा कि मैं भी आराम कर रहा हूं...इस कहानी का सार यह है कि शांति के लिए किसी खास उपलब्धी का इन्तजार बेकार है....आप जैसे भी हैं खुश रहें.....सफलता अपनी जगह है और शांति अपनी जगह....

1 comment:

Balendu Priyadarshan said...

Dear Gopiji,
The article not only shows your basic instinct but also states that to what extent you are a man of deep intellect.In very lucid manner, you have successfully differentiatd between the success and peace.
Just keep it up.
B. Priyadarshan